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जंगल क्यों घर पर मान और अभिमान जीवन प्रफुल्लित मानव रहो पाणिग्रहण लड़ना रहो शौकत और शान मनभावन डटे रहो मानव हो कदमों घबराना नही मंगलकारी जीते रहो दाम्पत्य जीवन बयां

Hindi प्रफुल्लित रहो Poems